इस्लामाबाद शांति वार्ता

इस्लामाबाद शांति वार्ता: अमेरिका-ईरान के बीच नहीं बनी सहमति, जेडी वेंस ने जताई निराशा

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इस्लामाबाद शांति वार्ता: पाकिस्तान की राजधानी में अमेरिका और ईरान के बीच चली लंबी कूटनीतिक चर्चा का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है। Al Jazeera के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार, 12 अप्रैल 2026 को पुष्टि की कि 21 घंटों तक चली इस मैराथन वार्ता के बावजूद दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए।

जेडी वेंस ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे ईरान के लिए एक ‘बुरी खबर’ बताया और स्पष्ट किया कि अमेरिका एक ऐसी प्रतिबद्धता चाहता था जिसमें ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने का ठोस वादा करे। इस्लामाबाद शांति वार्ता उच्च स्तरीय बैठक में जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल थे।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच गतिरोध बरकरार: जेडी वेंस ने कहा- इस्लामाबाद शांति वार्ता में नहीं बनी आपसी सहमति

इस्लामाबाद शांति वार्ता: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ हुई मैराथन चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देश किसी साझा समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ और शर्तें पूरी स्पष्टता के साथ मेज पर रखी थीं, परंतु ईरानी पक्ष ने उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया। इस्लामाबाद शांति वार्ता में घंटों तक चली कूटनीतिक माथापच्ची के बाद भी दोनों देशों के बीच की दूरियां कम नहीं हो सकीं।

परमाणु मुद्दे पर कड़ा रुख:
भले ही इस्लामाबाद शांति वार्ता बेनतीजा रही हो, लेकिन अमेरिका ने अपना रुख साफ कर दिया है। वेंस ने दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप का प्राथमिक लक्ष्य ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने से रोकना है। अमेरिका चाहता है कि तेहरान यह लिखित और स्थायी गारंटी दे कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उन्हें विकसित करने वाली किसी तकनीक का अधिग्रहण करेगा।

वेंस ने स्वीकार किया कि ईरान का वर्तमान परमाणु ढांचा काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया गया है, लेकिन भविष्य की योजनाओं को लेकर अविश्वास अभी भी कायम है। उन्होंने अंत में कहा कि अब यह ईरान पर निर्भर करता है कि वह भविष्य में सकारात्मक कदम उठाता है या नहीं।

इस्लामाबाद वार्ता विफल: अमेरिका-ईरान के बीच इन 3 बड़े मुद्दों पर अड़ा पेंच, मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

इस्लामाबाद शांति वार्ता: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया कूटनीतिक कोशिशें तीन मुख्य विवादों के कारण बेनतीजा रहीं। इन मतभेदों ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

टकराव के 3 मुख्य कारण:

  1. परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी: अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) और भविष्य की परमाणु क्षमताओं पर बेहद कड़े प्रतिबंधों की शर्त रखी थी, जिसे तेहरान ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
  2. लेबनान और हिजबुल्लाह का मुद्दा: ईरान चाहता था कि अमेरिका लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई को रुकवाए। हालांकि, अमेरिका और इजरायल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह विषय वर्तमान वार्ता के एजेंडे का हिस्सा नहीं है।
  3. होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz): इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर ‘टैक्स’ वसूलने की ईरान की कोशिशों पर अमेरिका ने सख्त ऐतराज जताया।

इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल होने के बाद अब आगे क्या? सैन्य टकराव की आशंका

इस्लामाबाद शांति वार्ता में बातचीत टूटने के बाद पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव चरम पर पहुंचने के आसार हैं। पिछले 14 दिनों से जारी अस्थायी संघर्ष विराम अब पूरी तरह खतरे में है।

ताजा स्थिति:

  • समुद्री मोर्चा: अमेरिका ने होर्मुज जलसंधि में बिछाई गई ईरानी माइंस को हटाने के लिए अपने दो युद्धपोत तैनात कर दिए हैं।
  • जवाबी कार्रवाई का डर: चूंकि ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही इस मार्ग की नाकेबंदी कर रखी है, इसलिए अमेरिकी जहाजों की मौजूदगी पर ईरान की तरफ से तीखी सैन्य प्रतिक्रिया होने का खतरा मंडरा रहा है।

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