महिला आरक्षण बिल लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) के पारित न हो पाने के बाद पैदा हुए राजनीतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। महिलाओं के लिए महिला आरक्षण का सपना फिलहाल अधूरा रहने के कारण माना जा रहा है कि पीएम इस संशोधन की अहमियत और सरकार के अगले कदमों पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात एक बार फिर देश के सामने अपनी बात रखेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज रात ठीक 8:30 बजे प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम अपना संदेश देंगे। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में अटक जाने के कारणों और इस विधेयक की देश के भविष्य के लिए जरूरत पर विस्तार से बात कर सकते हैं। गौरतलब है कि लोकसभा में इस महत्वपूर्ण महिला आरक्षण बिल को पर्याप्त समर्थन न मिल पाने के बाद भाजपा और एनडीए के अन्य घटक दल विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
महिला आरक्षण बिल के विषय पर अपनी बात रख सकते हैं पीएम मोदी
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सत्ता पक्ष द्वारा विपक्षी दलों—जैसे कांग्रेस, सपा और डीएमके—को ‘महिला विरोधी’ करार देने की मुहिम तेज हो गई है। ऐसी संभावना है कि आज रात प्रधानमंत्री मोदी इन विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों और आरोपों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब देंगे। महिला आरक्षण बिल और लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी से जुड़े इस संवैधानिक संशोधन के खारिज होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। पीएम मोदी इस संबोधन के जरिए जनता को यह समझा सकते हैं कि यह कानून करोड़ों महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कितना अनिवार्य था।
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सरकार ने सदन में क्या अनुरोध किया था?
शुक्रवार को भारतीय संसदीय इतिहास में एक बड़ा राजनीतिक गतिरोध देखा गया, जब 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। इसके कारण संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलने की प्रक्रिया पर एक बार फिर विराम लग गया है। महिला आरक्षण बिल का मुख्य लक्ष्य साल 2029 के चुनावों से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा की कुल सीटों में इजाफा करना था।
सदन का चुनावी गणित:
- कुल मतदान: 528 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया।
- पक्ष में मतदान: 298 सदस्यों ने बिल का समर्थन किया।
- विरोध में मतदान: 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया।
किसी भी संवैधानिक बदलाव के लिए दो-तिहाई बहुमत (कम से कम 352 वोट) अनिवार्य होता है, जो इस बार सरकार हासिल नहीं कर सकी। बिल के विफल होने के बाद, सरकार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से औपचारिक रूप से यह भी विनती की है कि दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर फिलहाल कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) का मुख्य उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। हालांकि इस बार लोकसभा में इसे जरूरी बहुमत नहीं मिल सका, लेकिन प्रधानमंत्री का संबोधन यह संकेत दे सकता है कि सरकार इसे लेकर कितनी गंभीर है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए देश की आधी आबादी को विधायी निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर एक साथ कैसे आते हैं।
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