मशहूर गायिका आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है।, जिसने अपनी आवाज़ से कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। लेकिन जिस आशा भोसले की आवाज़ में दुनिया को चुलबुलापन और ऊर्जा मिलती थी, असल ज़िंदगी में आशा भोसले को बहुत कम उम्र से ही दुखों का पहाड़ झेला था। आशा भोसले का जीवन संघर्ष की एक ऐसी दास्तां है, जो किसी को भी भावुक कर दे।
आशा भोसले का जीवन संघर्ष: 16 साल की उम्र में बगावत और शादी
आशा भोसले जी के जीवन का सबसे दुखद मोड़ तब आया जब उन्होंने केवल 16 साल की उम्र में अपने परिवार और बड़ी बहन लता मंगेशकर की मर्जी के खिलाफ जाकर 31 साल के गणपतराव भोसले से विवाह किया। जिसे उन्होंने अपना हमसफ़र चुना, वही रिश्ता उनके लिए अंधेरे का कारण बन गया। ससुराल में उन्हें एक बहू के रूप में कभी सम्मान नहीं मिला और उन्हें मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना सहनी पड़ी। उस दौर में आशा भोसले को न केवल अपनों से दूर होना पड़ा, बल्कि एक रूढ़िवादी माहौल में अपनी पहचान बचाने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
संगीत की मल्लिका आशा भोसले: गर्भवती होने पर मिला ‘घर निकाला
आशा भोसले के जीवन का सबसे हृदयविदारक क्षण वह था, जब वे अपने तीसरे बच्चे (बेटे आनंद) के साथ गर्भवती थीं। उस नाज़ुक और संवेदनशील समय में उन्हें ससुराल से बेदखल कर दिया गया। दो छोटे बच्चों की ज़िम्मेदारी और कोख में पल रही तीसरी संतान के साथ आशा जी को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं, जिसके बाद वे हार न मानते हुए वापस अपने मायके लौट आईं।
हैरानी की बात यह है कि इतनी प्रताड़ना सहने के बाद भी उनके मन में अपने पति के प्रति कोई द्वेष नहीं रहा। वे हमेशा सकारात्मकता के साथ कहती थीं कि यदि वे गणपतराव भोसले से न मिलतीं, तो उन्हें उनके तीन प्यारे बच्चे कभी प्राप्त नहीं होते। इसी चट्टानी हौसले ने उन्हें बाद में संगीत की दुनिया का शिखर छूने की शक्ति दी।
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पंचम दा और आशा भोसले: संगीत की एक रूहानी दास्तां
आशा भोसले जी के जीवन में खुशियों का नया सवेरा तब आया जब संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) उनके जीवन का हिस्सा बने। 1980 में दोनों विवाह के बंधन में बंधे। हालांकि, बाद के वर्षों में वे अलग-अलग रहने लगे थे, लेकिन उनके बीच का आपसी सम्मान और संगीत का रूहानी रिश्ता ताउम्र बरकरार रहा। 90 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा देखने लायक थी, जब उन्होंने दुबई के लाइव कॉन्सर्ट में अपनी प्रस्तुति से पूरी दुनिया को दंग कर दिया था। उनके लिए संगीत सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी की डोर थी।
आशा भोसले के 5 सदाबहार गाने जिन्हें दुनिया कभी नहीं भूलेगी
1-दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा)
2-पिया तू अब तो आजा (कारवां)
3-चुरा लिया है तुमने जो दिल को (यादों की बारात)
4-इन आँखों की मस्ती के (उमराव जान)
5-मेरा कुछ सामान (इजाज़त)
आशा भोसले के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर
पिछले कुछ दिनों से सीने में संक्रमण और थकान के कारण आशा जी मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उपचाराधीन थीं। उनकी पोती, जानाई भोसले ने सोशल मीडिया के ज़रिए प्रशंसकों से प्रार्थना की अपील भी की थी। लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, सुरों की यह मशाल हमेशा के लिए शांत हो गई। 92 साल की उम्र में आशा भोसले का निधन भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
वे अपने पीछे गीतों की एक ऐसी विरासत और हौसले की वो मिसाल छोड़ गई हैं, जो युगों-युगों तक संगीत प्रेमियों का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने दुनिया को सिखाया कि जीवन के सुर बिगड़ें भी, तो भी अपनी ताल नहीं खोनी चाहिए।

