Trump Warns Iran: राष्ट्रपति ट्रंप की ‘The Storm Is Coming’ पोस्ट से दुनिया में हलचल। US सैन्य हमलों की तैयारी में, कच्चा तेल $120 के पार और शेयर बाजार धराशायी।
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी
दुनिया भर में ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ का मशहूर डायलॉग ‘Winter is coming’ विनाश का संकेत माना जाता है, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही पोस्ट किया है जिसने वैश्विक स्तर पर दहशत पैदा कर दी है। ट्रंप ने अपनी एक AI-जनरेटेड फोटो के साथ लिखा— ‘THE STORM IS COMING. NOTHING CAN STOP WHAT IS COMING.’ यानी तूफान आ रहा है, जिसे कोई नहीं रोक सकता। यह रहस्यमयी चेतावनी उस समय आई है जब Trump Warns Iran की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ट्रंप की ‘रहस्यमयी’ पोस्ट और ईरान में मची दहशत
डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी जो तस्वीर साझा की है, उसे कूटनीतिक हलकों में ईरान के लिए अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह पोस्ट ठीक उस समय की गई जब ईरान ने प्रस्तावित युद्धविराम (Ceasefire) समझौते पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ट्रंप की इस ‘स्टॉर्म’ पोस्ट को ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन का संकेत माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह रणनीति ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ बनाने का हिस्सा है।
CENTCOM की घातक प्लानिंग: ईरान के ठिकानों पर ‘शक्तिशाली’ प्रहार
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर हमलों की एक विस्तृत और घातक योजना तैयार कर ली है। इस प्लानिंग में ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों पर ‘छोटे लेकिन बेहद शक्तिशाली’ हमलों की जबरदस्त स्ट्राइक शामिल है।
राष्ट्रपति ट्रंप गुरुवार को CENTCOM प्रमुख ब्रैड कूपर से इस नई सैन्य योजना पर विस्तृत ब्रीफिंग लेने वाले हैं। इस ब्रीफिंग के बाद ही तय होगा कि अमेरिका अपनी अगली चाल क्या चलेगा। Trump Warns Iran का यह सिलसिला अब सीधी सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल गहरा गए हैं।
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ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के मुख्य बिंदु:
- समुद्री नाकेबंदी: ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी हटाने से दोटूक इनकार कर दिया है।
- यूरैनियम संवर्धन: अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 20 वर्षों के लिए अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह बंद कर दे।
- परमाणु चर्चा: ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है जिसमें परमाणु वार्ता को भविष्य के लिए टालने की बात कही गई थी।
ग्लोबल मार्केट में हाहाकार: कच्चा तेल $120 के पार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस तनाव का सबसे भीषण असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर पड़ा है। गुरुवार को जैसे ही Trump Warns Iran से जुड़ी सैन्य खबरों ने बाजार में दस्तक दी, कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो वैश्विक महंगाई को बढ़ाने का बड़ा संकेत है।
वैश्विक शेयर बाजार पूरी तरह से लाल निशान में डूब गए हैं। भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे और निफ्टी व सेंसेक्स में 1% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के बीच इस बात का सबसे बड़ा डर है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद किया जा सकता है, जिससे दुनिया भर की तेल सप्लाई ठप हो जाएगी।
ईरान को घुटनों पर लाने की जिद
डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस बार बेहद सख्त है। उन्होंने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ नाकेबंदी महीनों तक चल सकती है। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तोड़ना है ताकि वह उनकी शर्तों पर समझौता करने को मजबूर हो जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस बार “नो डील” की स्थिति में सैन्य विकल्प का उपयोग करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। Trump Warns Iran का यह एपिसोड आने वाले कुछ ही घंटों में एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें राष्ट्रपति ट्रंप और CENTCOM प्रमुख की होने वाली इस हाई-लेवल ब्रीफिंग पर टिकी हैं।
डिस्क्लेमर: moneycontrolguide.com पर दी गई यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया अपडेट्स पर आधारित है। लेख में बताए गए कच्चे तेल के दाम और शेयर बाजार के आंकड़े केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं। युद्ध या कूटनीतिक तनाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है। हम अपने पाठकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें। यह वेबसाइट किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती है।
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