US Air Armada Mission Iran: 176 विमानों का खौफनाक सच और 45 घंटे का रेस्क्यू
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे गोपनीय घटनाओं में से एक, US Air Armada Mission Iran का सच अब दुनिया के सामने है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए इस खुलासे ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को एक नया मोड़ दे दिया है। जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है मध्य पूर्व से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद गोपनीय और साहसी मिशन का खुलासा किया है, जिसे ‘एयर अर्माडा’ (Air Armada) नाम दिया जा रहा है। यह मिशन ईरान के भीतर फंसे अमेरिकी सैन्य कर्मियों और मलबे को बचाने के लिए चलाया गया था। इस अभियान की सबसे खास बात इसकी जटिलता थी—7 अलग-अलग स्थान, 176 अत्याधुनिक विमान और लगातार 45 घंटों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन। US Air Armada Mission Iran अमेरिकी सैन्य इतिहास का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है।
US Air Armada Mission Iran: क्या था ट्रंप का यह गुप्त सैन्य ऑपरेशन?
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, US Air Armada Mission Iran मिशन तब शुरू हुआ जब ईरान ने एक अमेरिकी मानव-चालित विमान को मार गिराया। ईरान की सेना सक्रिय रूप से अमेरिकी पायलट और संवेदनशील उपकरणों की तलाश कर रही थी। ऐसे में पेंटागन ने एक ऐसी योजना बनाई जो किसी हॉलीवुड फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। अमेरिका ने ईरान को भ्रमित करने के लिए एक साथ 7 अलग-अलग लोकेशंस पर अपनी गतिविधियों को अंजाम दिया, जबकि असली रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक ही गुप्त स्थान पर चल रहा था।
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7 स्थान और 176 विमान: ईरानी रडार को चकमा देने का ‘मास्टर प्लान
इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत इसकी संख्या थी। ट्रंप ने बताया कि कुल 176 विमानों को हवा में तैनात किया गया था। इनमें से 155 विमानों का मुख्य कार्य केवल दुश्मन (ईरानी सेना) को गुमराह करना था। ये विमान ईरानी रडार प्रणाली पर इस तरह से मंडरा रहे थे कि ईरानी कमांडरों को यह समझ नहीं आ रहा था कि असली हमला या बचाव अभियान कहाँ चल रहा है।
इस ‘एयर अर्माडा’ में अमेरिका के सबसे घातक लड़ाकू विमानों और जासूसी ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया, जिनमें शामिल थे:
- F-15E स्ट्राइक ईगल: जो युद्ध की शुरुआत के बाद ईरान द्वारा गिराया गया पहला मानव-चालित विमान बना।
- MQ-9 रीपर: टोही और हमले के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन्स।
- E-3 सेंट्री (AWACS): जो हवा में रडार और कमांड सेंटर की तरह काम कर रहा था।
- KC-135 स्ट्रैटोटैंकर: मिशन के दौरान विमानों में ईंधन भरने के लिए इनका उपयोग किया गया।
मिशन की चुनौतियाँ: ‘Friendly Fire’ और कीमती विमानों का नुकसान
हालांकि मिशन सफल रहा, लेकिन अमेरिका को इसमें भारी कीमत भी चुकानी पड़ी। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान का निशाना “भाग्यशाली” रहा जिसने F-15E को गिरा दिया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ विमान ‘फ्रेंडली फायर’ (Friendly Fire) का शिकार भी हुए। कुवैत के F/A-18 हॉर्नेट से संबंधित एक घटना में अमेरिका ने अपने तीन स्ट्राइक ईगल विमान खो दिए। इसके अलावा, सऊदी अरब के बेस पर हुए हमलों और इराक में हुई दुर्घटनाओं में भी कई कीमती सैन्य संपत्ति का नुकसान हुआ।
ईरान की प्रतिक्रिया और कूटनीति
ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। वहीं, सैन्य जानकारों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर विमानों का संचालन करना यह दर्शाता है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपने सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ना चाहता। इस मिशन ने न केवल अमेरिका की ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ क्षमता को साबित किया है, बल्कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को भी एक नई दिशा दे दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि US Air Armada Mission Iran ने आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदल दी है।
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निष्कर्ष: कुल मिलाकर, US Air Armada Mission Iran ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल ताकत से नहीं बल्कि तकनीक और गुमराह करने की कला (Deception) से जीते जाते हैं। 176 विमानों और 45 घंटों की इस मेहनत ने मध्य-पूर्व की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया है।

